Essay On Abul Kalam Azad In Hindi Language

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Short Essay on 'Maulana Abul Kalam Azad' in Hindi | 'Maulana Abul Kalam Azad' par Nibandh (300 Words)

Short Essay on 'Maulana Abul Kalam Azad' in Hindi | 'Maulana Abul Kalam Azad' par Nibandh (300 Words)
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद

'मौलाना अबुल कलाम आज़ाद' का जन्म 11 नवम्बर, 1888 को हुआ था। अबुल के पिता मौलाना खैरूद्दीन एक विख्यात विद्वान थे, जो बंगाल में रहते थे। उनकी माँ आलिया एक अरब थी और मदीन के शेख़ मोहम्मद ज़ाहिर वत्री की भतीजी थी। अरब देश के पवित्र मक्का में रहने वाले एक भारतीय पिता और अरबी माता के घर में उनका जन्म हुआ। पिता मौलाना खैरूद्दीन ने उनका नाम मोहिउद्दीन अहमद रक्खा। आगे चलकर वे मौलाना अबुल कलाम आज़ाद एवं मौलाना साहब के नाम से प्रसिद्ध हुए। तेरह साल की आयु में उनका विवाह ज़ुलैखा बेगम से हो गया ।

मौलाना आज़ाद एक विद्वान, पत्रकार, लेखक, कवि एवं दार्शनिक थे। इन सबसे बढ़कर मौलाना आज़ाद अपने समय के धर्म के एक महान विद्वान थे। उन्होंने 1912 में 'अल हिलाल' नामक एक उर्दू अख़बार का प्रकाशन प्रारम्भ किया। यह अख़बार भारत और विदेशों में बहुत जल्दी प्रसिद्ध हो गया। उन्होंने 1919 के रॉलेट एक्ट के विरोध में असहयोग आंदोलन को संगठित करने में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। वह वरिष्ठ राजनीतिक नेता थे। स्वतंत्र भारत में मौलाना आज़ाद भारत सरकार के पहले शिक्षा मंत्री थे।

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद जब बोलते थे तो श्रोता मंत्रमुग्ध होकर उन्हें सुनते थे। वे एक प्रभावशाली वक्ता थे। भारत के पहले शिक्षा मंत्री बनने पर उन्होंने नि:शुल्क शिक्षा, भारतीय शिक्षा पद्धति एवं उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना में अत्यधिक सराहनीय कार्य किया। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना का श्रेय मौलाना आज़ाद को ही जाता है। 22 फ़रवरी सन् 1958 को मौलाना आज़ाद का निधन हो गया। वर्ष 1992 में मरणोपरान्त मौलाना आज़ाद को भारत के सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया। एक इंसान के रूप में मौलाना महान थे, उन्होंने हमेशा सादगी का जीवन पसंद किया। मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के जन्मदिवस 11 नवम्बर को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा दिवस घोषित किया गया है।
 

मौलाना अबुल कलाम आजाद

Maulana Abul Kalam Azad

मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्म 17 नवंबर, 1888 को मक्का में हुआ था। उनके बचपन का नाम अहमद था। उनके पिता उन्हें ‘फिराजबख्त’ के नाम से पुकारते थे। फिराजबख्त का अर्थ होता है सौभाज्य अथवा आशाओं का हीरा। ये दोनों नाम उनके बचपन तक रहे। बड़े होने पर उनका नाम अबुल कलाम हो गया। आजाद उनका उपनाम था।

सत्रह वर्ष की अवस्था में वे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए मिस्र गए। काहिरा के अल-अजहर विश्वविद्यालय में उन्होंने दो वर्षों तक शिक्षा प्राप्त की।

सन 1912 में उन्होंने एक उर्दू साप्ताहिक अल हिलाल का प्रकाशन और संपादन शुरू किया। उस पत्र द्वारा अबुल कलाम ने राष्ट्र को धार्मिक एकता और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने निष्पक्ष और निर्भीक होकर पत्रकारिता-धर्म का पालन किया। सन 1915 में सरकार ने इस पत्र का प्रकाश बंद करा दिया। उसके बाद उन्होंने सन 1916 में ‘अल-बलाग’ नामक पत्र का प्रकाशन और संपादन किया। वे ‘अल-बलाग’ के काध्यम से गोरी सरकार के खिलाफ आग उगलते रहे। कुछ ही महीने बाद ‘अल-बलाग’ के प्रकाशन पर सरकार ने रोक लगा दी। मौलाना को बंगाल से निर्वासित कर दिया गया। वे झारखंड के रांची शहर में जाकर रहने लगे। अंग्रेजों को इससे भी संतोष नहीं हुआ और सरकार ने उन्हें उनके घर में ही नजरबंद कर दिया। नजरबंदी के दौरान उन्होंने दो महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं। पहली पुस्तक का नाम था ‘गुब्बारे खातिर’। दूसरी कुरआन शरीफ पर लिखी गई टिप्पणी थी।

सन 1920 में जेल से रिहा होने के बाद मौलाना कांग्रेस में शामिल हो गए। सन 1921 में कांग्रेस-सत्याग्रह में अन्य कांग्रेसियों के साथ वे भी गिरफ्तार कर लिए गए। सन 1923 में जब वे जेल से रिहा हुए तब कांग्रेस दो दलों में बंट चुकी थी। गदम दल और नरम दल।

सन 1930 में मौलाना को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। सन 1954 में वे पुन: कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में चुने गए। इस पद पर वे छह वर्षों तक बने रहे।

सन 1947 में देश के विभाजन और आजादी के पश्चात मौलाना को भारत सरकार में शिक्षा मंत्री का पद भार दिया गया। इस पद पर वे लगातार 11 वर्षों तक रहे। उन्होंने अंतिम श्वास तक देश की सेवा की।

12 फरवरी 1957 को उनका देहांत हो गया।

August 27, 2017evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo CommentHindi Essay, Hindi essays

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